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सोशल मीडिया

केजरीवाल जी! आपको इस समय योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की याद बहुत आ रही होगी

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Ajay Prakash : केजरीवाल जी! आपको इस समय योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की याद बहुत आ रही होगी। उन्होंने जब कहा कि भ्रष्टाचारियों को अपने साथ जोड़ने से बाज आओ तो आपने उन्हें बेइज्जत कर पार्टी से बाहर कराया जी, अब परिणाम सामने है जी। हां जी, और आप यह न सोचिएगा जी कि आपका मुंहलगा सचिव आपकी सरकार का एकमात्र भ्रष्टाचारी रिकॉर्ड का है जी, बल्कि आपके मंत्रियों—विधायकों से भ्रष्टाचार की बदबू उठने लगी है जी। चर्चा उत्तरी पूर्वी दिल्ली से लेकर पश्चिमी दक्षिणी दिल्ली तक में है जी। भरोसा न हो तो अपने कार्यकताओं के बीच सर्वे करा लीजिए जी। कसम जंतर—मंतर के आपके उस मफलर और बढ़ती सर्दी की जी, आपको फिर एक बार चेहरा ढकना पड़ जाएगा जी।

Nadim S. Akhter : नरेंद्र मोदी ने आज साबित कर दिया कि भारत के संविधान और संघ-राज्य व्यवस्था के प्रति उनके मन में कितना निरादर है। दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ आज तक आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। मुख्यमंत्री को विश्वास में लिए बगैर केंद्र सरकार ने इतनी बड़ी कार्रवाई कर दी। सबसे बड़ी बात। क्या दिल्ली के उपराज्यपाल को इसकी जानकारी थी और अगर थी तो क्या उन्होंने केजरीवाल को विश्वास में लिया था? बात यहाँ अरविन्द केजरीवाल की नहीं है। बात संविधान की है। केजरीवाल कोई चोर-डकैत नहीं हैं, मुख्यमंत्री हैं, जनता ने उन्हें चुना है। फिर ऐसा क्या था कि केंद्र सरकार ने अपने मातहत आने वाली सीबीआई के माध्यम से इतना बड़ा constitutional blunder कर डाला? नरेंद्र मोदी को इसका जवाब तो देना पड़ेगा। एक बात और। मोदीजी इस गुमान में न रहें कि वो इंदिरा गांधी या संजय गांधी बन सकते हैं। साथ ही उन्हें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि केंद्र की सत्ता सिर्फ पांच साल के लिए उनके पास है, सो जो राजनितिक परिपाटी उन्होंने शुरू की है, वो जाने क्या-क्या गुल खिलाएगी जब सत्ता उनके हाथ में नहीं होगी।

प्रकाश कुकरेती : आजादी के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री के ऑफिस में सीबीआई का छापा पड़ा... दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल के दफ्तर में सीबीआई ने छापा मारा.. दफ्तर सील किया गया... केजरीवाल के दफ्तर की फाइलें देंखी गईं, जिसके बाद सीबीआई ने दफ्तर सील किया.. राजनाथ सिंह ने कुछ कहने से इनकार किया, जबकि वैंकया नायडू ने कहा- ''कांग्रेस के समय सीबीआई सरकार के इशारे पर काम करती थी, मगर अब सीबीआई ने जो भी किया, अपनी मर्जी से किया''. मुल्क में तानाशाही भले न हो, मगर यह हरकत एक तानाशाही हरकत ही है. आखिर केजरीवाल के खिलाफ सीबीआई के पास कौन सी शिकायत आई, कि उनको सीएम के दफ्तर को सील करना पड़ा.

Usha Dubey : भ्रष्टाचारमुक्त भारत के नाम पर आंदोलनकारियों का यूज़ कर सत्ता तक आनेवाले.. वही केजरीवाल के प्रधान सचिव का भ्र्ष्टाचार में लिप्त का पोल खुल रहा... अभी तो पूरी कहानी बाकी है की इनके पार्टी में ऊपर से नीचे तक कितना भ्र्ष्टाचार है अभी देखना बाकी है.!! गलत कामों का अड्डा बना है आम आदमी पार्टी ऑफिस..!! इसी गलत कामों के विरोध के कारण पार्टी संस्थापक योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण,प्रो.आनंद कुमार,एडमिरल रामदास जैसे अनेकों महान हस्तियों को पिछवाड़े लात मार मार कर, बाउंसर द्वारा हमला करवा करवा कर बाहर किया गया था.. सत्ता मिलते हज़ारों आंदोलनकारियों को पार्टी से बाहर करने का राज पुरे देश वासियों को धीरे - धीरे एक एक कर पोल खोल से मिलने लगा की केजरीवाल का असली चेहरा क्या है.. आज केजरीवाल के प्रधान सचिव पर राजेन्द्र कुमार पर भ्र्ष्टाचार के आरोप में CBI ने राजेन्द्र कुमार की ऑफिस और घर को सील किया.. ऑफिस सील होने से केजरीवाल तिलमिलाए .. तिलमिलाहट में PM नरेंद्र मोदी को कायर और मनोरोगी बोल गए.. CBI तो अपना काम करेगी ही.. CBI अब तक बड़े से बड़े मंत्री और सांसदों को भी नहीं छोड़ी.. उसका काम गलत को गलत बोलना है जो बोलती रही और आज भी बोल रही.. कहानी अभी बाकी है.. शेष अगले दिन के इन्तजार में..

पत्रकार अजय प्रकाश, नदीम एस. अख्तर, प्रकाश कुकरेती और उषा दुबे के फेसबुक वॉल से.

विफल हो रहे केजरीवाल को सीबीआई रेड करवा के अभयदान दे दिया!

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Vivek Satya Mitram : बॉस, सच्चाई ये है कि इस देश पर राज़ सिर्फ कांग्रेस कर सकती है। बीजेपी के वश की बात नहीं। मूर्खों की जमात है। ना तो इनका पॉलिटिकल सेंस अच्छा है ना ही कॉमन सेंस। ना तो इन्हें हिस्ट्री याद रहती है ना ही जियोग्राॉफी। जो केजरीवाल बहुत से मोर्चों पर विफल साबित होने लगा था उसे इन्होंने सीबीआई रेड करवाके अभयदान दे दिया। इतना भी याद नहीं रहा इन्हें कि भारत में निकम्मे से निकम्मे नेता और पार्टियां जब जब बर्बाद होने के कगार पर खड़ी थीं 'सहानुभूति' की संजीवनी से लैंड्सलाइड विक्ट्री के साथ सत्ता में वापस लौटीं। खैर अच्छा है, मूर्ख हमारे ऊपर राज करें उससे तो अच्छा ही है कि कोई शातिर राजकाज चलाए। बधाई हो केजरीवाल, तु़म्हारे एजेंट बीजेपी में अपना काम ठीक तरह से कर रहे हैं।

Om Thanvi : मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के घर पर छापा अलग बात है, पर उनका दफ्तर मुख्यमंत्री का दफ्तर भी है। अगर मुख्यमंत्री को भरोसे में लेकर छापा नहीं मारा गया तो इसका मतलब क्या समझा जाए? क्या सीबीआइ या उसके नियंत्रक प्रधानमंत्री केजरीवाल के कामकाज पर भी संदेह करते हैं? लेकिन संसद में अरुण जेटली कह रहे हैं अधिकारी पर छापा मुख्यमंत्री के सचिव बनने से पहले के पदों के लिए है, केजरीवाल सरकार से इस छापे का कोई संबंध नहीं है। फिर मुख्यमंत्री को भरोसे में लेने में क्या दिक्कत थी? यह प्रकरण केंद्र-राज्य के संबंधों की बुनियाद को तो खोखला करेगा ही, राज्य ही नहीं खुद केंद्र सरकार के अधिकारियों में भी रोष पैदा करेगा। राजेन्द्र कुमार भ्रष्ट हैं तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए, मगर बात प्रक्रिया की है। मोदी सरकार और केजरीवाल सरकार के बीच चल रही तनातनी को देखते हुए केंद्र को और एहतियात बरतना चाहिए - अगर मोदी कोई दूसरा संदेश खुद नहीं देना चाहते। अगर देना चाहते हैं तो उनके स्तर पर यह संकीर्ण राजनीति मानी जाएगी। और देखिए कितने मंत्री और भाजपा नेता सीबीआइ की कार्रवाई की सफाई देने के लिए टीवी पर मौजूद हैं! चोर की दाढ़ी में तिनका? 

Sanjaya Kumar Singh : सीबीआई का छापा संजीव चतुर्वेदी को काम देने के लिए है। लोग भूल गए थे, ना काम करूंगा, ना करने दूंगा। क्षमा कीजिएगा, ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा।

पत्रकार विवेक सत्य मित्रम, ओम थानवी और संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

सोशल मीडिया में बदजुबान होती अभिव्यक्ति की आजादी

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फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प सरीखे सोशल साइट्स ने वैश्विक स्तर पर लोगों को करीब आने का मौका दिया है तथा एक-दूसरे के विचारों और संस्कृति से परिचित भी कराया है। संचार का सदव्यवहार संवाद और संस्कृतियों के प्रसार का हमेशा से आधार रहा है। जिस तरह से सोशल मीडिया का विस्तार हुआ है, लोगों के विचारों में खुलापन आ गया है। सोशल मीडिया ने पूरे विश्व में लोगों को आन्दोलित सा कर दिया है।  राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व धार्मिक मुद्दे सोशल मीडिया पर अक्सर बहस के विषय बनते रहते हैं। राजनेता, खिलाड़ी, सिनेजगत के कलाकार सहित युवा वर्ग में सोशल मीडिया के प्रति काफी रूझान है। हर छोटे व बड़े मुद्दों पर अपनी बात या राय जाहिर करने का यह बेहतर मंच साबित हुआ है मगर वैचारिक अतिवाद की वजह से इसका बेजां इस्तेमाल भी खूब हो रहा है। इस वैचारिक अतिक्रमण ने अभिव्यक्ति की आजादी को कुछ हद तक बदजुबान बना दिया है।

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नाथूराम गोडसे को अब आम राय से भारत का पहला आतंकवादी घोषित कर देना चाहिए

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Dilip C Mandal : भारत में आतंकवाद की शुरुआत नाथूराम गोडसे की पिस्तौल की उन 3 गोलियों से हुई, जो उसने एक निहत्थे बूढ़े के सीने में उतार दी थी. पूरे राष्ट्र को एक स्वर से नाथूराम गोडसे को देश का "पहला आतंकवादी" करार देते हुए, उसकी भर्त्सना करना चाहिए. किसी भी देशभक्त को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए. आरएसएस ने भी कहा दिया है कि उसका गोडसे से कोई लेना-देना नहीं है. नाथूराम का अपराध सिद्ध हुआ और उसे फांसी पर भी टांगा गया.

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Political parties Criticized the arrest of journalist for his facebook post

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Vijyender Sharma

SHIMLA : Various political parties Strongly Criticized the arrest of journalist  Rajneesh Sharma  for allegedly making objectionable comments against Himachal Chief Minister Virbhadra Singh on a Facebook post. The Aam Aadmi Party, the CPM and the BJP also demanded the cancellation of the FIR registered against him.

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