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: अखिलेशजी! इनको नौकरी, मुआवजा नहीं न्याय की है दरकार : दिल्ली में गैंगरेप की शिकार दामिनी को न्याय दिलाने के लिए देश एकजुट हुआ। दरिंदों को सजा दिलाने की मांग ने जोर पकड़ा। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भुक्तभोगी लड़की और उसके साथी को नौकरी और आर्थिक मदद करने का ऐलान किया। देश के कोने-कोने से उठे जोरदार विरोध और मुख्यमंत्री के मदद का ऐलान, दोनों को अच्छी शुरुआत माना जा सकता है पर क्या आपको पता है यूपी में दर्जनों अभागी ‘दामिनियों’ का आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है। उनके परिजनों को न्याय की दरकार है। इन गुमनाम ‘दामिनियों’ के लिए न तो कोई जुलूस निकला और ना ही कहीं धरना-प्रदर्शन। इनके लिए न्याय दूर की कौड़ी है। मिलिए इलाहाबाद और उसके बगल के जिले प्रतापगढ़, कौशांबी की इन अभागन दामिनियों से। ये रहीं दिल दहला देने वाली वारदातें।

1-  मांडा की बिटिया का गौना रूका

देश के पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को राजा मांडा के नाम से भी जाना जाता है। वीपी सिंह का घर मांडा है। इलाहाबाद के उसी मांडा इलाके के बरहाकला गांव में 22 सितंबर की रात शौच के लिए घर से बाहर निकली इंटरमीडिएट की एक छात्रा को उसी गांव के दो युवक उठा ले गए। गैंगरेप किया। भुक्तभोगी लड़की की शादी सालभर पहले हुई थी पर गौना नहीं हुआ था। इस घटना से लड़की के ससुराल वालों ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया है।

2- मासूम को नहीं बख्शा, कहां फंसी डीएनए रिपोर्ट

इलाहाबाद शहर के करेली में सहारा कान्वेंट स्कूल में कक्षा दो की छात्रा का अपहरण कर गैंगरेप किया गया। बाद में गला घोटकर उसकी हत्या कर दी गई। मासूम बच्ची की लाश ससुर खदेरी नदी के पास मिली थी। घटना एक मार्च 2011 की है। चार आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए। आरोपियों का डीएनए टेस्ट हुआ है पर अभी तक रिपोर्ट ही नहीं आ सकी है।

3-पलये की गूंगी-बहरी बिटिया

इलाहाबाद के गंगापार इलाके में नवाबगंज थाना। टाउन एरिया लालगोपालगंज के बगल स्थित है पलये गांव। यहां गूंगी बहरी ग्यारह वर्षीय किशोरी की अस्मत तार-तार कर दी गई। 12 जून 2012 को उसी गांव के दो युवक गैंगरेप कर फरार हो गए। हद तो तब हो गई जब दूसरे दिन गांव में पंचायत कर ‘पंच-परमेश्वरों’ ने आरोपियों पर इक्कीस हजार का जुर्माना लगाकर माफी दे दी। मीडिया में मामला उछलने के बाद अफसरों को पता चला। दोनों को पुलिस ने जेल भेजा। एक आरोपी युवक अविवाहित है। किशोरी उस युवक से शादी करना चाहती है पर आरोपी युवक के परिवार वाले राजी नहीं हैं।

4- किसान की बेटी से दरिंदगी

नवाबगंज के बगल मौजूद है होलागढ़ थाना। शिवपुर वीरभानपुर के किसान की बेटी 22 अक्टूबर 2012 की शाम अपने खेत से घर वापस लौट रही थी। इसी गांव के तीन युवकों ने किशोरी को अगवा करने के बाद गैंगरेप किया। भुक्तभोगी किशोरी के पिता ने होलागढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। अभी तक तीनों आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

5- प्रतापगढ़ में चार दिन में पांच गैंगरेप और कत्ल

प्रतापगढ़ में भी एक थाना है नवाबगंज। यहां स्थित आस्थान गांव में 21 जून 2012 को बारह साल की लड़की को चार युवकों ने अगवा किया। जंगल में ले जाकर गैंगरेप करने के बाद गला घोंटकर मार डाला। लंबे बवाल के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। आरोपियों पर गैंगस्टर लगाया गया। खास बात यह है कि 17 से बीस जून यानि चार दिन में गैंगरेप और  हत्या की पांच बड़ी वारदातें हुई।

6- छह महीने बीते, नहीं पकड़े गए तीनों आरोपी

कौशांबी जिले के सैनी कोतवाली में करनपुर सौरई गांव है। सात जुलाई 2012 को यहां एक किशोरी को दो युवकों ने अगवा कर लिया। बोलेरो में लेकर किशोरी को अपने रिश्तेदार के घर फतेहपुर जिले के खखेरू थाना क्षेत्र के बरहटा गांव पहुंचे। तीनों युवकों ने किशोरी से गैंगरेप किया। आईजी के निर्देश पर तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई पर तीनों आरोपी छह महीने बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

7- ...और चाय पीने के बहाने चौकी से भाग निकले तीन दरिंदे

कौशांबी के सदर कोतवाली के बहादुरपुर गांव में ‘तीन-बहादुरों’ ने एक युवती से 31 दिसंबर की रात गैंगरेप किया। युवती की शिकायत पर पुलिस तीनों को पकड़कर पलिस चौकी ले आई। इसके बाद शुरू हुआ पुलिसिया खेल। पुलिस समझौता करने की कोशिश में लग गई। भुक्तभोगी युवती को भी बुलाया गया पर पुलिस की मंशा भांपकर युवती पुलिस चौकी आई ही नहीं। उधर, पुलिस चौकी से तीनों आरोपी चाय पीने के बहाने भाग निकल भागे और पुलिस टापती रह गई।

8- डड़वा की ‘दामिनी’ जीवन मौत से जूझ रही

प्रतापगढ़ में अंतू थाना है। यहां डड़वा गांव में 28 अगस्त को दिन दहाड़े दोपहर ढाई बजे चार युवकों ने हाथ पांव बांध कर गैंगरेप किया। इसके बाद उसे जिंदा फूंक डालने की कोशिश की। उसी समय युवती के फूफा के पहुंचने पर चारों वहशी दरिंदे भाग निकले। शिकायत करने के बाद भी पुलिस ने कोई मदद नहीं की। पुलिस आरोपियों को क्लीनचिट देने में जुटी है। युवती के कई अंग जल गए हैं। वह महिला अस्पताल में जीवन-मौत से संघर्ष कर रही है। प्रतापगढ़ की इस ‘दामिनी’ के आंख का आंसू पोछने वाला कोई नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेशजी! इन ‘अभागन दामिनियों’ को नौकरी और आर्थिक मुआवजा नहीं, एक अदद न्याय की दरकार है। लाख टके का सवाल है कि क्या इनको न्याय मिल सकेगा?

इलाहाबाद से वरिष्‍ठ पत्रकार शिवाशंकर पाण्‍डेय की रिपोर्ट. वे दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्‍तान समेत कई अखबारों में काम कर चुके हैं.

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