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प्रदेश

यूपी में कांग्रेसी कुछ ऐसा माहौल बना रहे जैसे वह खुद सत्ता के सबसे बड़े दावेदार हों!

  • Written by अजय कुमार
  • Category: प्रदेश

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अजय कुमार, लखनऊ

यूपी में अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की तेजी चौकाने वाली है। कांग्रेस आलाकमान ने देश भर के अपने तमाम धुरंधरों को मिशन यूपी पर लगा दिया है। कांग्रेस से जुड़ी खबरें मीडिया में सबसे अधिक सुर्खिंया बटोर रही हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा जब कांग्रेस खेमे से कोई चौका देने वाली खबर न आती हो। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत कुमार(पीके)जब से कांग्रेस के साथ आये हैं तब से कांग्रेस मेें कुछ अधिक बेचैनी देखने को मिल रही है। इस पर गुलाम नबी आजाद को यूपी का प्रभारी बनाया जाना ‘सोने पर सुहागा’ साबित हो रहा है। उम्मीद है कि देर-सबेर यूपी कांग्रेस को निर्मल खत्री की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष भी मिल जायेगा। सब कुछ चुनावी बिसात के लिये किया जा रहा है।

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पश्चिमी यूपी फिर सियासत की प्रयोगशाला

  • Written by अजय कुमार
  • Category: प्रदेश

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लखनऊ : ऐसा लगता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की धर्म नगरी मथुरा में खौफनाक हादसे के बाद उठे सियासी भूचाल, दादरी की घटना में नये मोड़ और मुजफ्फरनगर दंगों की आड़ में सियासी सूरमा एक बार फिर चुनावी बिसात बिछाने में जुट गये हैं।वेस्ट यूपी में जो सियासी मंजर दिखाई दे रहा है उससे तो यही लगता है कि 2017 के विधान सभा चुनाव में तमाम राजनैतिक दल अपनी विजय गाथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही लिखना चाहते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जिस तरह से तमाम राजनैतिक दलों ने अपना सियासी अखाड़ा बना रखा है वह चौकाने वाली घटना भले ही न हो लेकिन प्रदेश के अमन-चैन के लिये खतरे की घंटी जरूर है। एक बार फिर पश्चिमी यूपी वहीं खड़ा नजर आ रहा है जहां वह 2014 के लोकसभा चुनावों के समय खड़ा था। यहां रोज कुछ न कुछ ऐसा घट रहा है जिससे सियासतदारों को अपनी सियासी फसल उगाने के लिये यह क्षेत्र ‘सोना उगलने वाली जमीन’ नजर आ रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2017 में भी पश्चिमी यूपी तमाम दलों के लिये सियासी प्रयोगशाला बनती नजर आ रही है। यहां ऐसे ही बड़े-बड़े राजनेता दस्तक नहीं दे रहे हैं।

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यूपी में कार्यरत 416 आईपीएस अफसरों में से कोई भ्रष्ट नहीं!

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यूपी में भ्रष्टाचार को लेकर भले ही राजनैतिक गलियारों से लेकर गली-मोहल्लों के नुक्कड़ तक घमासान मचा हो और भले ही यूपी की बदहाल कानून व्यवस्था के लिए पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को एक प्रधान कारक माना जाता हो पर सरकारी रिकॉर्ड में यूपी की कानून व्यवस्था के रखवाले कहे जाने वाले वर्तमान कार्यरत 416 आईपीएस अधिकारियों में से कोई भी भ्रष्ट नहीं है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन 416 आईपीएस अधिकारियों में से न तो किसी के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की कोई जांच लंबित है और न ही इनमें से किसी के भी खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति का कोई भी मामला शासन स्तर पर लंबित है.

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चंदोखर की हत्या पर मौन हैं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

  • Written by बी.पी.गौतम
  • Category: प्रदेश

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अखिलेश सरकार ने प्रदेश भर के तालाबों की भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन सरकार का निर्देश बुंदेलखंड के बाहर जाकर निरर्थक सा हो जाता है, क्योंकि प्रदेश के अधिकांश जिलों के तालाब माफियाओं और दबंगों के कब्जे में हैं। हाल-फिलहाल बदायूं जिले का चंदोखर नाम का प्राचीन तालाब चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस प्रकार चरखारी के तालाबों का दो सौ वर्ष पुराना इतिहास है। चरखारी के तालाब चन्देल राजाओं द्वारा बनवाए गए थे, उसी प्रकार बदायूं शहर के चंदोखर तालाब का भी प्राचीन इतिहास है, यह राजा महीपाल द्वारा बनवाया गया था, जिसका नाम चंद्रसरोवर था, जो अब चंदोखर के नाम से जाना जाता है।

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पीलीभीत जेल में सात कैदियों की पीट कर हत्या करने के मुकदमें को समाजवादी सरकार ने जनहित में वापस लिया

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लखनऊ : पीलीभीत जेल में सात कैदियों की पीट पीट कर हत्या के मामले को वापस लेने की हो न्यायिक जांच... यह बात आज एस.आर. दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी बयान में कही है. ज्ञात हो कि 1994 में जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री थे तो पीलीभीत जेल में जेल स्टाफ द्वारा 28 टाडा कैदियों की बुरी तरह से पिटाई की गयी थी जिनमें से 7 कैदियों की मौत हो गयी थी. इसकी सीबीसीआईडी द्वारा विवेचना की गयी थी जिसमें 42 जेल कर्मचारियों के दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया था. इनमें से एक कर्मचारी को गिरफ्तार भी किया गया था.

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