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विविध

प्राइवेट प्‍लेस में अश्‍लील हरकत करना अपराध नहीं

  • Written by Bhadas Desk
  • Category: विविध

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बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने कहा- प्राइवेट प्‍लेस में अश्‍लील हरकत करना या इसे देखना आईपीसी की धारा 294 के तहत नहीं आता

बॉम्‍बे हाई कोर्ट ने उन 13 लोगों के खिलाफ केस खारिज कर दिए, जिन पर एक फ्लैट में महिलाओं के साथ अश्‍लील हरकत करने के आरोप थे। हाईकोर्ट ने कहा कि निजी जगह पर इस तरह की कृत्‍य आईपीसी के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता। जस्‍ट‍िस एनएच पाटिल और एएम बदर की बेंच उस याचिका पर सुनवाई की गई थी, जिसमें इन लोगों पर से आईपीसी की धारा 294 के तहत दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका आरोपियों में से ही एक की ओर से दायर की गई थी। आईपीसी की धारा 294 का मतलब है कि पब्‍ल‍िक प्‍लेस में अश्‍लील हरकत करना या पब्‍लि‍क प्‍लेस में अश्‍लील गाना या शब्‍द बोलना जिससे दूसरों को दिक्‍कत हो।

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लगता है संघ महिला पुरुष समानता के विचार से सहमत नहीं!

  • Written by अंबरीश कुमार
  • Category: विविध

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Ambrish Kumar : अपनी सहयोगी रहीं पत्रकार शुभी चंचल ने संघ के बारे में टिपण्णी की है कि शाखा के समय पार्क में उनकी उपस्थिति संघ के बुजुर्ग प्रचारकों को नागवार गुजरी और उन्हें दूर जाने को कहा. ऐसा लगता है कि संघ महिला पुरुष समानता के विचार से सहमत नहीं है. ऐसा क्यों है कि सेना में महिलाएं जा सकती हैं पर संघ में नहीं. संघ के कार्यकर्त्ता राजीव भृगु ने पिछली पोस्ट पर पूछा था कि कितने शब्दों में वे टिपण्णी लिखें. वे पूरा लेख लिख सकते हैं जिसे हम प्रकाशित भी करेंगे.

वरिष्ठ पत्रकार और शुक्रवार मैग्जीन के संपादक अंबरीश कुमार के फेसबुक वॉल से.

क्या डॉ. आंबेडकर भी देशद्रोही थे?

  • Written by एस.आर.दारापुरी
  • Category: विविध

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आज कल पूरे देश में देशभक्ति की सुनामी आई हुयी है. कभी वह JNU में देशद्रोहियों को बहा ले जाती है और अब वह महाराष्ट्र के असेम्बली हाल तक पहुँच गयी है जो MIM पार्टी के विधान सभा सदस्य वारिस पठान को बहा ले गयी है क्योंकि उस ने "भारत माता की जय" का नारा लगाने से मना कर दिया था. परिणामस्वरूप उसे भाजपा, कांग्रस और एनसीपी ने मिल कर निलंबित कर दिया. अब सवाल पैदा होता है कि क्या किसी सदस्य द्वारा उक्त नारा लगाना कोई संवैधानिक बाध्यता है? वर्तमान में तो ऐसी कोई भी बाध्यता नहीं है पर फिर भी उसे निलंबित कर दिया गया है. दरअसल इस के पीछे बहुसंख्यक हिन्दू वर्ग की मान्यता को दूसरों पर जबरदस्ती थोपने की कोशिश है जिस में कांग्रेस भी उतनी ही लिपित है जितनी भाजपा. दरअसल कांग्रेस शुरू से ही भाजपा को हिंदुत्व की दौड़ में पिछाड़ने में लगी रही है परन्तु वह भाजपा को अब तक पिछाड़ने में सफल नहीं हुयी है. डॉ. आंबेडकर इसे “बहुसंख्या का आतंकवाद” कहते थे और स्वतंत्र भारत में इस के अधिक उग्र हो जाने की सम्भावना के बारे में बहुत आशंकित थे जो अब सच्च होता दिखाई दे रहा है.

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आमजन की परेशानियों पर हावी राष्ट्रप्रेम का बेताल... भारत के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इसमें अपना बेहद अविवेकपूर्ण, बेईमान रुख अपनाया...

  • Written by शैलेंद्र चौहान
  • Category: विविध

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मौजूदा वक़्त में देश एक गहरे अनुदारवादी और अति-राष्ट्रवादी दौर से गुज़र रहा है. वैचारिक मतभेदों की परवाह किए बिना हर राजनीतिक दल भारत में मूढ़ता को बढ़ावा दे रहा है. राष्ट्रवाद की जो परिभाषा सरकार दे रही है वह संकुचित और रूढ़िवादी है. यह सिर्फ़ बहुसंख्यक धार्मिक समूहों को तुष्ट करने के लिए और असहमति के स्वर दबाने वाला है. अफ़सोस है, राष्ट्रवाद की इतनी संकीर्ण दृष्टि सत्तारूढ़ पार्टी की है. राष्ट्रवाद की उसकी अवधारणा भारतीय संविधान में निहित उदारवादी लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती देती है. फ्रेंच लेखक अल्बेयर कामू ने एक बार लिखा था, "मैं अपने देश को इतना प्यार करता हूँ कि मैं राष्ट्रवादी नहीं हो सकता."

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शिव योगी हैं, नशेड़ी नहीं

  • Written by अनुज अग्रवाल
  • Category: विविध

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हाल ही में महाशिवरात्रि का पर्व बीत गया| यानि कि भगवान् आशुतोष का दिन| कई मित्रो के मेसेज आये शिवरात्रि की शुभकामनाये प्रेषित करते हुए| सभी का धन्यवाद सभी को शुभकामनायें| रूद्र आप सबकी रक्षा करें| पर मन उस तरह प्रफुल्लित हुआ जिस तरह एक त्यौहार पर होना चाहिए| कारण है कि जितने भी मैसेज आये उनमे से आधे में भगवान् शिव का वर्णन एक नशेड़ी की तरह किया गया|

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