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साधु का आखिरी संदेश- 'बिल्ली भूलकर भी मत पालना'

  • Written by ओशो
  • Category: विविध

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एक प्राचीन कथा है। एक संन्यासी जंगल में रहता है अकेला। भिक्षा मांगने जाता है। भिक्षा लेकर आता है तो घर में कभी थोड़ी देर को रोटी रख देता है; भोजन रख देता है। थोड़ी देर रोटी भोजन रुक जाता है, तो चूहे धीरे-धीरे घर में पैदा हो गये; आने लगे पड़ोस से, जंगल से, खेतों से। तो किसी मित्र ने सलाह दी—एक भक्त ने—कि ऐसा करो, एक बिल्ली पाल लो। बिल्ली चूहों को खा जायेगी।

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सवाल लोकतांत्रिक अनास्था का : आज तर्क और असहमति को 'देशद्रोह' का नाम दिया जा रहा है

  • Written by विवेक दत्त मथुरिया
  • Category: विविध

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आज देश लोकतांत्रिक आस्था और अनास्था के सवाल से जूझ रहा है। इस वक्त देश अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति से सामना कर रहा है। जिसका संकेत सरकार के मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी ने पहले ही दे दिए थे। आज 'देशद्रोह' बनाम  'देशभक्त' की विवेकहीन बहस में लोकतांत्रिक मूल्य और कानून के राज के प्रति अनास्था को प्रतिपादित करने की कथित कोशिश को परवान चढ़ाया जा रहा है। इन कोशिशों में मीडिया का एक राग दरबारी तबका बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। दूरदृष्टा लोगों ने इस तरह की खतरनाक प्रवृत्ति के संकेत 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त दे दिए थे, पर लोकसभा चुनाव के दौरान 'अच्छे दिनों' के जुमले से जुड़े आक्रामक प्रचार में 'खतरों की शंकाओं' को हवा हवाई कर दिया। लेकिन आज उसी खतरनाक सच से दो-चार हो रहा है।

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उज्जैन कुम्भ तक करो इंतजार, मंदिर न बना तो हिल जाएगी सरकार : साध्वी देवा ठाकुर

  • Written by दुर्गसिंह राजपुरोहित
  • Category: विविध

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दुर्गसिंह राजपुरोहित, बाड़मेर

बाड़मेर में अखिल भारतीय हिंदू महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष साध्वी देवा ठाकुर ने एक्सक्लूजिव बातचित में यह कह कर सभी को चौंका दिया कि अगर राम मन्दिर पर कुछ भी काम नहीं हुआ तो उज्जैन कुम्भ मेले का इंतजार करो उसमे जो कुछ होगा वो सरकार को हिला कर रख देगा। उन्होंने डॉन छोटा राजन को हिन्दू समाज का हितेषी बताने का भी प्रयास किया और कहा कि सभी संतों पर कांग्रेस सरकार में हुए अत्याचारों पर भी वर्तमान हिंदुओं द्वारा चुनी भाजपा सरकार की खामोशी पर प्रश्न चिन्ह लगाया और राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर के अपनी हिंदुत्व की छवि बचा लेने का अनुरोध किया।

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क्या हम सभी राष्ट्रद्रोही हैं?

  • Written by रुपेश कुमार
  • Category: विविध

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आज पूरे देश में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में ।ठटच् के पूर्वनियोजित बवंडर से उठे तूफान ने ‘‘ राष्ट्रभक्त ’’ और ‘‘ राष्ट्रद्रोही ’’ की परिभाषा को ही सवाल के घेरे में खड़ा कर दिया है। सोशल साइट्स व खाए-पीए अघाए लोगों में हर रोज ‘‘राष्ट्रभक्त ’’ और ‘‘ राष्ट्राद्रोही’’ की नई नवेली परिभाषा इस तरह से अवतरित हुई है कि सोते-जागते उन्हें सिर्फ यही दो शब्द दिख रहे है। जब पूरे देश में बवाल मचा हो तो ‘‘ बोल कि लव जिहाद है तेरे ’’ को ध्यान में रखते हुए और ‘‘ तेरे इस झूठ को नहीं मानता नहीं मानता ’’ कि राह पर चलते हुए इस आशंका व डर के साथ कि कहीं मैं भी कल राष्ट्रद्रोही घोषित न हो जाउं, इस पूरी घटना पर तफ्शीश से कुछ कहना चाहता हूं।

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इस शंकराचार्य को नहीं मालूम कि बुद्ध के बिना भारत की कल्पना नहीं हो सकती : दिलीप मंडल

  • Written by दिलीप मंडल
  • Category: विविध

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Dilip C Mandal : कोई शंकराचार्य हैं। उनका बयान आया है कि प्रधानमंत्री विदेश जाकर हर जगह और बार बार यह क्यों कहते हैं कि भारत बुद्ध की ज़मीन है! शंकराचार्य को इससे तकलीफ़ है। मैं सोच रहा हूं कि प्रधानमंत्री को विदेश जाकर क्या कहना चाहिए? कि भारत हनुमान की भूमि है? माता शेरांवाली की धरती है? साईं बाबा की जमीन है? बालाजी की धरती है। राम की धरती है? ब्रह्मा की ज़मीन है? दुर्गा की ज़मीन है? किसकी धरती बताएँ वे। दुनिया को क्या बताएँ? नरसिंह अवतार का देश है या वामनअवतार का देश है? मनु की धरती है?

बुद्ध नहीं तो कौन?

मुझे नहीं मालूम कि शंकराचार्य कितने पढ़े लिखे हैं। या उन्हें कभी राष्ट्रपति भवन जाने का मौका मिला है या नहीं। अपने पेशे और काम की वजह से मैं कई बार गया हूँ। जितना हिस्सा मैंने देखा है, उसमें वहाँ की सबसे भव्य मूर्ति बुद्ध की ही है। वह भी सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण दरबार हॉल में। जहाँ शपथ ग्रहण होता है। सम्मान दिए जाते हैं। जहाँ राष्ट्रपति विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से मिलते हैं।

बुद्ध के बिना भारत की कल्पना नहीं हो सकती। हालाँकि उनके विचारों की इसी धरती पर ब्राह्मणवादीयों-पोंगापंथियों के हाथों थोड़े समय के लिए हार हुई है, फिर भी। बुद्ध से जानी जाती है यह धरती। यह मूर्ति पहले राष्ट्रपति भवन में नहीं थी। सोच समझकर लगाई गई है। भारत की कल्पना बुद्ध के बिना मुमकिन नहीं, इसका प्रमाण है यह मूर्ति, जो राष्ट्रपति भवन में शोभायमान है।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक वॉल से.

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