TPL_GK_LANG_MOBILE_MENU

दुख-सुख

जैनी आज उन्हीं पापों की गठरी ढो रहे जिनसे विरत रहने के लिए महावीर स्वामी ने कहा था

  • Written by मुकेश कुमार
  • Category: दुख-सुख

User Rating: 0 / 5

Star inactiveStar inactiveStar inactiveStar inactiveStar inactive

Mukesh Kumar : जैनियों ने महावीर स्वामी के साथ ज़बर्दस्त विश्वासघात किया है। जैसा कि इतिहास सिद्ध है, वे नास्तिक थे और शुरू में जैन धर्म भी नास्तिक ही था। अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, अचौर्य जैसे सिद्धांतों पर उनका ज़ोर था। चलिए मान लिया कि उनकी तरह दिगम्बर होकर कठिन साधना करना सबके लिए मुश्किल काम है, मगर जैन और भी तो बहुत कुछ कर सकते थे लेकिन वे उसी तरह पाखंडी है गए जैसे दूसरे धर्मों के अनुयायी। वे आज उन्हीं पापों की गठरी ढो रहे हैं जिनसे विरत रहने के लिए महावीर ने कहा था।

Read more: जैनी आज उन्हीं पापों की गठरी ढो रहे जिनसे विरत रहने के लिए महावीर स्वामी ने कहा था

भारत में साठ प्रतिशत गिरफ्तारियां अनावश्यक हो रही हैं

  • Written by मनीराम शर्मा
  • Category: दुख-सुख

User Rating: 5 / 5

Star activeStar activeStar activeStar activeStar active

भारतीय न्याय व्यवस्था पर श्वेत-पत्र

उदारीकरण से देश में सूचना क्रांति, संचार, परिवहन, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में सुधार अवश्य हुआ है किन्तु फिर भी आम आदमी की समस्याओं में बढ़ोतरी ही हुई है| आज भारत में आम नागरिक की जान-माल-सम्मान तीनों ही सुरक्षित नहीं हैं| ऊँचे लोक पदधारियों को सरकार जनता के पैसे से सुरक्षा उपलब्ध करवा देती है और पूंजीपति लोग अपनी स्वयं की ब्रिगेड रख रहे हैं या अपनी सम्पति, उद्योग, व्यापार की सुरक्षा के लिए पुलिस को मंथली, हफ्ता या बंधी देते हैं| छोटे व्यावसायी संगठित रूप में अपने सदस्यों से उगाही करके सुरक्षा के लिए पुलिस को धन देते हैं और पुलिस का बाहुबलियों की तरह उपयोग करते हैं| अन्य इंस्पेक्टरों-अधिकारियों की भी वे इसी भाव से सेवा करते हैं| व्यावसायियों को भ्रष्टाचार से वास्तव में कभी कोई आपति नहीं होती, जैसा कि भ्रष्टाचार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधिपति ने कहा है,  वे तो अपनी वस्तु या सेवा की लागत में इसे शामिल कर लेते हैं और इसे अंतत: जनता ही वहन करती है| इतिहास साक्षी है कि व्यापरी वर्ग को किसी भी शासक या शासन प्रणाली में कोई आपति नहीं रही क्योंकि वह पैसे की शक्ति को भली भांति पहचानता है और जरुरत पड़ने पर चन्दा भेंट आदि देने में सक्षम है|

Read more: भारत में साठ प्रतिशत गिरफ्तारियां अनावश्यक हो रही हैं

राहुल सांकृत्यायन की जन्मतिथि 9 अप्रैल और पुण्यतिथि 14 अप्रैल : भागो नहीं, दुनिया को बदलो!

User Rating: 0 / 5

Star inactiveStar inactiveStar inactiveStar inactiveStar inactive

''जिनका हित इस सामाजिक ढाँचे के ऐसे ही बने रहने में है वे हमें शहीदों और महापुरुषों के विचारों पर ध्यान देने के बजाय उन्हें अवतार बनाकर पूजने की शिक्षा देते हैं, उनके ग्रंथों का अध्ययन करने के बजाय उन्हें मत्था टेकना सिखाते हैं और समाज को बदलने का यत्न करने के बजाय अवतार की प्रतीक्षा करने का उपदेश देते हैं।'' -राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन Rahul Sankrityayan (1893-1963) भारत में वैचारिक-सांस्कृतिक क्रान्ति के एक ऐसे सूत्रधार थे जिनका यह अटल विश्वास था कि जनता स्वयं अपने इतिहास का निर्माण करती है। महापुरुष कोई आसमानी जीव नहीं होते बल्कि वे लोग होते हैं जो इतिहास-निर्माण के काम में जनता की अगुवाई करते हैं। आम मेहनतक़श जनता को उसकी अपार संगठित शक्ति से परिचित कराना और अन्याय एवं शोषणपूर्ण व्यवस्था के विरुद्ध उसे सामाजिक क्रान्ति के लिए तैयार करना राहुल के जीवन का मिशन था। इसके लिए राहुल ने केवल अपनी लेखनी और वाणी का ही इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि आज़ादी की लड़ाई और किसानों-मज़दूरों के आन्दोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, लाठियाँ खाईं, जेल गये और हर तरह की क़ुर्बानी दी।

Read more: राहुल सांकृत्यायन की जन्मतिथि 9 अप्रैल और पुण्यतिथि 14 अप्रैल : भागो नहीं, दुनिया को बदलो!

समान अवसर के लिये समान शिक्षा की जरुरत

  • Written by अश्विनी उपाध्याय
  • Category: दुख-सुख

User Rating: 0 / 5

Star inactiveStar inactiveStar inactiveStar inactiveStar inactive

लोक कल्याण ही लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य है ! संविधान की प्रस्तावना में भी स्पस्ट किया गया है कि भारत एक सोशलिस्ट सेक्युलर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक है ! सरकार का मुख्य कर्तब्य है कि वह संविधान की प्रस्तावना में वर्णित उदेश्य – सामाजिक-आर्थिक न्याय, सामजिक-आर्थिक समानता और सबको समान अवसर सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक कदम उठाये ! आज शिक्षा का व्यापारीकरण हो गया है ! परिवार के  आर्थिक हालत के अनुसार  स्कूल की पांच केटेगरी बन गयी है ! लोअर इनकम ग्रुप, मिडिल इनकम ग्रुप, हायर इनकम ग्रुप और इलीट ग्रुप और सरकारी स्कूल, जहाँ गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले परिवारों के बच्चे पढ़ते है ! इन सभी स्कूलों की किताबें अलग-2 होती हैं!

Read more: समान अवसर के लिये समान शिक्षा की जरुरत

आंबेडकर की धर्मनिरपेक्षता की धरोहर को बिगाड़ रहे संघ परिवार और भाजपा सरकार किस मुंह से उनका गुणगान कर रहे!

  • Written by आनंद तेल्तुम्बडे
  • Category: दुख-सुख

User Rating: 4 / 5

Star activeStar activeStar activeStar activeStar inactive

इधर डॉ. आंबेडकर के स्मारकों की बाढ़ सी आ गयी है. आज कल  संघ परिवार डॉ. आंबेडकर जिन्होंने हिन्दू धर्म पर इतनी तीखी टिप्पणियाँ की थी जिस कारण उन्हें अपना कट्टर दुश्मन मानना चाहिए, को हथियाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है. उसी समय  दलितों और गैर दलितों में दूरी बढ़ती जा रही है और उन पर निर्बाध अत्याचार हो रहे हैं. अब इंग्लैंड में बाबा साहेब के नाम पर लन्दन में एक स्मारक होगा. बाबा साहेब 1920 के शुरू में इस घर में रहे थे जब वे लन्दन स्कूल आफ इकोनामिक्स में पढ़ रहे थे. अगस्त के तीसरे हफ्ते में नौकरशाही का घपला तब उजागर हुआ जब उक्त मकान मालिक ने एक रोषभरी चेतावनी दे डाली. यह शेखी बघारने वाले मंत्री के लिए काफी था क्योंकि उन्होंने कई माह पहले उक्त मकान को खरीद लिए जाने की घोषणा कर दी थी. इस चेतावनी के बाद चीजें तेज़ी से चलने लगीं और उम्मीद है कि उस 2050 वर्ग फीट मकान का सौदा 3.1 लाख पौंड में जल्दी तै हो जायेगा. ( नोट: अब उक्त मकान खरीद लिया गया है.)

Read more: आंबेडकर की धर्मनिरपेक्षता की धरोहर को बिगाड़ रहे संघ परिवार और भाजपा सरकार किस मुंह से उनका गुणगान...

सर्वाधिक लोकप्रिय पोस्ट

Follow Us>      Facebook         Twitter         Google+