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दुख-सुख

धार्मिकता को एक अकेली बात में सिकोड़ा जा सके तो वह है तादात्म्य का न होना

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बुद्ध ने कहा है कि जब मैंने जाना तो मैंने पाया है कि अदभुत हैं वे लोग, जो दूसरों की भूल पर क्रोध करते हैं! क्यों? तो बुद्ध ने कहा कि अदभुत इसलिए कि भूल दूसरा करता है, दंड वह अपने को देता है। गाली मैं आपको दूं और क्रोधित आप होंगे। दंड कौन भोग रहा है? दंड आप भोग रहे हैं, गाली मैंने दी! क्रोध में जलते हम हैं, राख हम होते हैं, लेकिन ध्यान वहां नहीं होता! इसलिए धीरे-धीरे पूरी जिंदगी राख हो जाती है। और हमको भ्रम यह होता है कि हम जान गये हैं! हम जानते नहीं-- क्रोध की सिर्फ स्मृति है और क्रोध के संबंध में शास्त्रों में पढ़े हुए वचन हैं और हमारा कोई अनुभव नहीं।

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पूर्णता एक विक्षिप्त विचार है, अपने अपूर्ण और सामान्य होने का आनंद लो

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पूर्णता एक विक्षिप्त विचार है। भ्रष्ट न होने वाली बात मूर्ख पोलक पोप के लिए उचित है पर समझदार लोगों के लिए नहीं। बुद्धिमान व्यक्ति समझेगा कि जीवन एक रोमांच है, प्रयास और गलतियां करते हुए सतत अन्वेषण का रोमांच। यही आनंद है, यह बहुत रसपूर्ण है! मैं नहीं चाहता कि तुम परफेक्ट हो जाओ। मैं चाहता हूं कि तुम जितना संभव हो उतना परफेक्टली, इनपरफेक्ट होओ। अपने अपूर्ण होने का आनंद लो! अपने सामान्य होने का आनंद लो!

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मथुरा कांड का एक पहलू यह भी : जवाहर बाग को चौतरफा घेरकर आग लगाने के बाद पुलिस ने धुआंधार फायरिंग में सैकड़ों को मार डाला!

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सरकार के संरक्षण में सार्वजनिक सम्पदा की लूट के कारण हुई मथुरा की घटना : उच्च न्यायालय के न्यायाधीश करें जांच, आश्रमों को दी जमीनों की भी हो जांच : जांच टीम ने किया मथुरा का दौरा, राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह को सौपेंगे रिपोर्ट

आगरा : जवाहर बाग की घटना ने उत्तर प्रदेश में सरकार के संरक्षण में जारी सार्वजनिक सम्पदा की लूट के सच को सामने लाया है। इस घटना में साफ तौर पर यह दिखता है कि उ0 प्र0 में कानून का राज नहीं है और न्यायालयों तक के आदेश निष्प्रभावी हो जाते है। जवाहरबाग में कब्जा की गयी 280 एकड़ जमीन की अनुमानित कीमत 56 अरब रूपए थी। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक नगर कार्यालय और जिला मुख्यालय के बगल में खुलेआम उद्यान विभाग के सार्वजनिक पार्क की इतनी कीमती जमीन पर दो साल से भी ज्यादा समय से अवैध कब्जा बरकरार रखना सरकार के संरक्षण के बिना सम्भव नहीं है।

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भारत की कम्युनिस्ट पार्टियों को जनता के बड़े तबके से अलगाव के कारणों की छानबीन करनी चाहिए : अखिलेंद्र प्रताप सिंह

  • Written by अखिलेंद्र प्रताप सिंह
  • Category: दुख-सुख

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पांच राज्यों के चुनाव पर कुछ बातें लोगों के सामने उभरकर आ रही थीं। केरल में वाम मोर्चे की सरकार बनेगी, असम में भाजपा सरकार बना सकती है और पश्चिम बंगाल में ममता की वापसी हो सकती है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि केरल में वाम मोर्चे को, असम में भाजपा को और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को इतनी अधिक सीटें मिलेंगी। दोनों प्रमुख द्रविड़ पार्टियों में तमिलनाडु में इतनी कांटे की टक्कर होगी, ऐसा भी नहीं सोचा जा रहा था। बहरहाल, पांच राज्यों के चुनावों में जो बात उभरकर आयी है वह यह है कि कांग्रेस के राजनीतिक प्रभाव में और गिरावट आयी है और भाजपा राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी बनकर उभर रही है। हालांकि, कांग्रेस के मत प्रतिशत में कोई खास गिरावट नहीं है। असम में आज भी वह भाजपा से आगे है। पश्चिम बंगाल में उसका वोट बढ़ा है, पांडिचेरी में उसकी सरकार बनी है और तमिलनाडु में भी लोकसभा चुनाव की तुलना में वोट बढ़ा है और पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में सीटें बढ़ी हैं। वहीं यदि केरल को छोड़ दिया जाए जहां भाजपा के मतों में लोकसभा चुनाव की तुलना में 0.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और हर राज्य में लोकसभा चुनाव की तुलना में भाजपा के मतों में गिरावट हुई है। पांच राज्यों की 824 सीटों में भाजपा को महज 64 सीटें ही मिली हैं फिर भी उसे एक विकासमान पार्टी के बतौर लोग देख रहे हैं जो कांग्रेस को बेदखल करती जा रही है।

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रामवृक्ष यादव तो मोहरा था... जय गुरुदेव से लेकर, आसाराम तक और रामपाल से लेकर परमानंद और नित्यानंद तक की यही कहानी है....

  • Written by नवीन कुमार
  • Category: दुख-सुख

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Navin Kumar : रामवृक्ष यादव तो मोहरा था। किसी गुरुदेव, उसकी दौलत और राजनीति के गठजोड़ का। वह पहला भी नहीं था आखिरी भी नहीं है। जंगलों में धूनी रमाने वाले, कंदमूल पर जीने वाले अनासक्त बाबाओं को जब से रुपया कमाने की लत लगी, आलीशान आश्रम बनाने की लत लगी, टीवी के कैमरों पर चमकने की लत लगी, कारोबार करने की लत लगी तभी से ऐसे गठजोड़ बनने शुरू हुए। सुना था कि संत मृत्यु से नहीं डरते। लेकिन बाबा जब इतना डरपोक होगा कि एक्स वाई ज़ेड टाइप की सुरक्षा लिए बगैर चल ही न सके तो समझ लीजिए वह आध्यात्म के धरातल पर कहां खड़ा है।

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