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रिलायंस की सीडीएमए सेवा अपनी अंतिम सांसे गिन रही है। रिलायंस ने अपने सभी सीडीएमए कस्टमर्स को जीएसएम के 4G नेटवर्क में अपग्रेड करना शुरु कर दिया है। 93 नंबर से शुरु होने वाली रिलायंस की सीडीएमए सेवा की अब तक अपनी अलग पहचान रही है। जीएसएम में अपग्रेड होने के बाद अब इस नंबर का अस्तित्व तो रहेगा, लेकिन सीडीएमए वाली पहचान नहीं रह पाएगी। वर्षों से रिलायंस सीडीएमए फोन का इस्तेमाल करने वाले मेरे जैसे लोगों का इससे कितना लगाव रहा है, इसकी बयां शब्दों में करना मुश्किल प्रतीत हो रहा। रिलायंस से मेरा गहरा लगाव रहा है। आज से 14 साल पहले हुई लॉन्चिंग के शुरुआती दिनों में ही रिलायंस सीडीएमए से मेरा संबंध जुड़ गया था। तब पटना में हुआ करता था, और अब दिल्ली में। लेकिन रिलायंस सीडीएमए फोन हमेशा मेरे साथ रहा। हां, इस दौरान कई बार मेरे फोन नंबर बदल गए, लेकिन क्या मजाल कि सीडीएमए छोड़कर जीएसएम सर्विस की तरफ कभी आंख उठाई हो।

तब ‘कर लो दुनिया मुट्ठी में’ इसी टैगलाइन के साथ धीरूभाई अंबानी की कंपनी रिलायंस ने साल 2002 में मोबाइल फोन की दुनिया में क्रांति ला दी थी। अपने पिता धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद अनिल अंबानी ने दिसंबर 2002 में रिलायंस इंफोकॉम के नाम से पूरे देश में एक साथ सीडीएमए मोबाइल सर्विस की शुरुआत की। ब्रांड नाम रखा ‘रिलायंस इंडिया मोबाइल’, जिसे हम संक्षेप में रिम (RIM) भी कहा करते थे।  रिलायंस ने सबसे सस्ता मोबाइल पेश किया था और इस सेवा के हत सभी 22 सर्किल में 20 हजार शहरों और 4.5 लाख गांवों को कवर किया गया था। तब मार्केट मे हच, बीपीएल, बीएसएनएल के अलावा कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं था। मुंबई सर्किल में 1994 को शुरु हुआ हच ( जो बाद में वोडाफोन बन गया) और 1994 में ही शुरु होने वाली बीपीएल मोबाइल टेलीकॉम सर्विस ( जो 2009 में लूप के नाम से जाना गया और जिसे 2014 में एयरटेल ने अधिग्रहित कर लिया) उस वक्त के चंद टेलीकॉम खिलाड़ी हुआ करते थे। लेकिन इनकी सर्विस सीमित टेलीकॉम सर्किल में हुआ करती थी। तब अकेली रिलायंस ही थी (बीएएसएनएल भी नहीं) जिसने 22 टेलीकॉम सर्किल में अपनी सीडीएमए सेवा को एक साथ लॉन्च किया।

वो रिलायंस ही थी, जिसने आज से 14 साल पहले बिना हैसियत वालों के हाथों में भी मोबाइल फोन थमा दिया था। आपको याद होगा कि रिलायंस ने दिसंबर 2002 में जब एलजी के मोबाइल हैंडसेट लॉन्च किए, तो किस तरह हाथों-हाथ बिके थे। ये मोबाइल हैंडसेट एलजी कंपनी के हुआ करते थे। तब जबकि हम भारतीयों के लिए मोबाइल फोन पर बात करना एक सपना हुआ करता था, उस वक्त रिलायंस ने शुरुआती दिनों में 10,500 रुपए लेकिन जल्द ही महज 500 रुपए में एलजी के दो-दो मोबाइल सेट रेवड़ियों की तरह बांटे। सबसे बड़ी खासियत यह थी कि दोनों हैंडसेट के बीच फ्री में बात करने करने की सुविधा थी। लैला-मजनूओं के बीच रिम की प्रसिद्धी इतनी थी, कि प्रत्येक 100 में से 50 फोन इन्हीं बिरादरी के पास हुआ करती थी। तब इसके नंबर 93 से नहीं बल्कि 3 से शुरु होते थे और बात करने के लिए लोकल कोड पहले ऐड करना पड़ता था। तब के सीडीएमए हैंडसेट में सिम बदलने की सुविधा तक नहीं थी। यानी कंपनी जो मोबाइल हैंडसेट मुहैया कराती थी, उसी हैंडसेट से काम चलाना पड़ता था। एलजी के उस हैंडसेट की रिंगटोन अब भी मेरे दिलोदिमाग में पूरी तरह रची-बसी हुई है। आज भले ही हम जैसे रिलायंस सीडीएमए कस्टमर्स पिछले कई महीनों से कॉल ड्रॉप का सामना करते-करते परेशान हो गए हैं, तब कॉल ड्रॉप का तो नामोनिशान तक नहीं था। बिल्कुल ही साफ और स्पष्ट आवाज। हमें तो पता नहीं था, ये कॉल ड्रॉप किस चिड़िया का नाम है। आज जब अपने सीडीएमए फोन से बात करता हूं, तो एक मिनट में ना जाने कितनी बार कॉल ड्रॉप होती है। थक-हारकर मैंने रिचार्ज करवाना ही बंद कर दिया। अब इनकंमिग कॉल आती भी है, तो बड़े ही मुश्किल से बात हो पाती है। खुशी है कि जीएएसएम में अपग्रेड होने के बाद अब ठीक से बात हो पाएगी। लेकिन उस दर्द का क्या, जो किसी अपने का अस्तित्व मिट जाने पर होता है। कुछ-कुछ यही महसूस कर रहा हूं।

अमित कुमार सिंह
सीनियर प्रोड्यूसर
लाइव इंडिया टीवी
फोन- 9013028432
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