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अम्बेडकर नाम की लूट है लूट पाये सो लूट.... अम्बेडकर और दलित प्रेम बना राजनीतिक दलों के लिए संजीवनी...

लगता है कि पहली बार संघ और भाजपा के चिंतकों ने वृहद राजनीतिक सोच के तहत दलित वर्ग में अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने के लिए डॉ० भीम राव अम्बेकर पर अपना होम वर्क जोर-शोर से शुरू कर दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण की पुनः समीक्षा वाले बयान से हुए राजनीतिक नुकसान की पूरे देश में भरपाई और ख़ास तौर से उत्तर प्रदेश में आगामी विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संघ और बीजेपी के रणनीतिकारों ने श्री राम और भारत माता की जय के नारों को पीछे छोड़ते हुए अब नए राजनीतिक समीकरणों को फलीभूत करने की दिशा में जय भीम का नारा पूरे जोशो खरोश से उछाल दिया है। 

राजनीति भी क्या अजीब चीज है, यह कब किसको कैसे कैसे पाठ मजबूरन पढ़ने पढ़ाने को मजबूर कर दे, कहा नहीं जा सकता। कल तक श्री राम और भारत माता की जय बोलने को राष्ट्र भक्ति का सबसे बड़ा तमगा मानने वाली बीजेपी अब इन दोनों नारो से ज्यादा तरजीह जय भीम के नारे को देने लगी है। तभी तो बीजेपी ने पूरे देश में पहली बार अम्बेडकर जयंती को जोर शोर से मनाकर यह सन्देश देने की कोशिश की कि बीजेपी ही दलितों की सबसे बड़ी हितैषी पार्टी है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा साहब के १२५वें जन्म दिवस पर उनके जन्म स्थान महू पहुँच कर बाबा साहब को श्राद्धांजलि देते हुए जय भीम का नारा लगाया और अम्बेडकर जयंती के अवसर पर १४ अप्रैल से २४ मई तक ग्राम उदय से भारत उदय अभियान की शुरुआत की और इस अभियान को प्रधानमन्त्री ने अम्बेडकर के आदर्शों से प्रेरित बताया। इसका संकेत साफ़ है कि बीजेपी आंबेडकर की दलित सोच पर सवारी करके भारत के गावों गावों में दलित वोट को भरमाना चाहती है।

कभी बीजेपी की छवि खांटी राष्ट्रवादी नारों जय श्री राम, भारत माता की जय, वन्दे मातरम जैसे नारों की हुआ करती थी परन्तु जब बीजेपी को लगा कि केवल कट्टर हिन्दू वादी छवि और सवर्ण जातियों की सहारे ही वह राजनीतिक वैतरणी को पार नहीं कर सकती तो उसने अपना पुराना चरित्र और चोंगा धीरे धीरे बदलना शुरू कर दिया जिसका पहला मुजाहिरा 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान हुआ जब बीजेपी ने मंदिर मुद्दे को एकदम किनारे कर विकास के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। अब आरएसएस और मोदी सरकार दोनों ने मिलकर अम्बेडकर को हथियाने सबसे बड़ा राजनीतिक दाव फेंका है। तभी तो बीजेपी के नेताओ की स्मरण शक्ति रातोरात चौड़ी हो गयी है और उन्हें अब अचानक याद आया कि बाबा साहब किसी एक वर्ग के नहीं वे तो राष्ट्र पुरुष थे।

बीजेपी की बाबा साहब को कब्जाने की मुहिम से सबसे बड़ा झटका बसपा सुप्रीमो मायावती को लगा है। उत्तर प्रदेश के २०१७ के आगामी विधान सभा चुनावों में लगभग सभी टीवी चैनलों और अखबारों के चुनावी सर्वेक्षण प्रदेश में माया सरकार के सत्तारूढ़ होने के संकेत दे रहे हैं। ऐसे में बीजेपी का बाबा साहब और दलित प्रेम के बहाने दलित वोट कब्जाने का रोडमैप बसपा सुप्रीमो के सपनों पर पानी फेर सकता है इसीलिए बसपा सुप्रीमो ने अपने दलित वोटों को सुरक्षित रखने और उनको आगाह करने के अंदाज में बाबा साहब की १२५ वी जयंती के कार्यकम में लखनऊ में कहा कि दलित वोटों के लिए मोदी अम्बेडकर और दलित प्रेम का नाटक कर रहे हैं। बीजेपी पर निशाना साधते हुए बसपा सुप्रीमो ने दलितों को सावधान करते हुए कहा कि विरोधी मजबूरी में डॉ० अम्बेडकर की जयंती मना रहे हैं। बीजेपी के अचानक जागे दलित और अम्बेडकर प्रेम से बसपा सुप्रीमो इस कदर घबराई हुयी थीं कि उन्होंने लखनऊ में अम्बेडकर जयंती पर दिए अपने ७३ मिनट के भाषण में आधे से ज्यादा वक्त मोदी पर हमला करने में बिताया। 

बीजेपी ही नहीं कांग्रेस, सपा सहित लगभग सभी पार्टियों की बसपा के दलित वोटो पर नजर है। तभी तो अम्बेडकर जयंती पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री कहते हैं कि बाबा साहब को असली  सम्मान तो कांग्रेस ने ही दिया है तभी तो एक मात्र कांग्रेस ही पूरे देश में बाबा साहब का १२५वा जयंती वर्ष मना रही है. आंबेडकर जयंती पर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी बाबा साहब का गुणगान करते हुए कहा कि बाबा साहब का भव्य स्मारक बनाने की घोषणा जल्द पूरी होगी। यही नहीं लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से सपा की घोषित प्रत्याशी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने तो यहां तक कह दिया कि मेरी इच्छा है कि मैं मिनी अम्बेडकर बनूं। उन्होंने कहा कि इस धरती पर बाबा साहब का एक बार फिर से जन्म होना चाहिए।   

राकेश भदौरिया
पत्रकार
एटा / कासगंज

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