Created on 05 January 2013

दामिनी रेप कांड के विरोध में रायसीना हिल्स पर भीड़ के सैलाब ने सरकार और खुफिया तंत्र को हिलाकर रख दिया है। सरकारी मशनीरी हैरत में है कि बिना किसी नेतृत्व के इतनी बड़ी तादाद में जनता सिर्फ सोशल मीडिया के जरिये एकजुट हुए और राष्ट्रपति भवन के पास तक आक्रोश जाहिर करने पहुंच गये। सरकार और खुफिया तंत्र की ओर से सोशल मीडिया को खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। इससे निपटने के लिए भी व्यापक विचार विमर्श इंटेलीजेंस और सरकार के बीच शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि देश के राजनीतिक और सांप्रदायिक माहौल को बिगाडऩे के लिए भविष्य में भी सोशल मीडिया अहम् भूमिका निभा सकता है। सुरक्षा के लिहाज से सोशल साइटें एक नयी चुनौती बनकर सरकार के सामने खड़ी हैं। इस बात की आशंका सोशल मीडिया साइटों पर निगरानी रखने वाली सरकारी एजेंसी ने जाहिर की है। रिपोर्ट में कहा गया है उग्र प्रदर्शन के पीछे इन साइटों का इस्तेमाल किया गया। भावनाओं को छू जाने वाले अनगिनत संदेशों के जरिये दिल्ली के यूथ को टारगेट किया गया। एजेंसी की रिपोर्ट पर कारगर कदम उठाने का निर्णय लिया गया है। सरकार और तमाम खुफिया एजेंसियां उन कारणों पर गहन चिंतन मंथन कर रही है जिससे भविष्य में इस तरह की स्थितियों की पुनरावृत्ति न होने पाए।

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Created on 05 January 2013

मेरे कानों में मुसलमानों के एक घटिया नेता और झूठे खैख्वाह अकबरूद्दीन औवेसी की कड़वी भाषा रह रह कर गूंज रही है, यू ट्यूब पर जब से मैंने उस आस्तीन के सांप का जहर उगलता हुआ एक घण्टे का भाषण सुना तब से मेरा रोम-रोम विद्रोह किये हुये है, मेरा ही नहीं बल्कि तमाम वतनपरस्त और इंसानियतपरस्त लोगों का खून खौल रहा है, खौलना भी चाहिये क्योंकि कोई भी हरामजादा गीदड़ मुल्क के किसी भी कोने में अपने द्वारा जुटाई गई किराये की भीड़ के सामने शेर बनकर दहाड़ने की कोशिश करें तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, अकबरूद्दीन औवेसी कहता है - मैं सिर्फ मुस्लिम परस्त हूं, उसे अजमल कसाब को फांसी दिये जाने का सख्त अफसोस है, वह टाइगर मेनन जैसे आतंकी का हमदर्द है, वह मुम्बई के बम धमाकों को जायज ठहराता है, देश के मुम्बई संविधान, सेकुलरिज्म और बहुलतावादी संस्कृति की खिल्ली उड़ता है। कहता है, हम तो दफन होकर मिट्टी में मिल जाते है मगर हिन्दू जलकर फिजा में आवारा की तरह बिखर जाते है, वह देश के दलितों व आदिवासियों को दिये गये रिजर्वेशन पर सवाल खड़े करता है और इन वर्गों की काबिलियत पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है।

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Created on 04 January 2013

Manisha Pandey : मेरे एक परिचित, पढ़े-लिखे, बुद्धिजीवी और नौकरीपेशा पुरुष मित्र शादी के बीस साल बाद अपनी पत्‍नी को तलाक दे रहे हैं। पत्‍नी की हालत ऐसी है कि मानो उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई हो। उसके लिए एक ईश्‍वर आकाश में है और दूसरा धरती पर - उसका पति। इन बीस सालों में दोनों ने अपनी जिंदगी, बुद्धि, ऊर्जा, समय, मेधा, ताकत कहां इन्‍वेस्‍ट की?

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Created on 04 January 2013

धार्मिक और आध्‍यात्मिक प्रतीकों तथा आस्‍थाओं का सनातन पर्व महा-कुम्‍भ विवादों में आ गया है। प्राचीनतम परम्‍पराओं में पवित्रताओं के सवालों और बदलावों के प्रवाहों में जबर्दस्‍त रोड़े पड़ गये हैं। व्‍यवस्‍था और हठों के बीच जिद दीवार इतनी ऊंची हो गयी है कि हजारों साल पुराने दुनिया के इस महानतम अनुष्‍ठान के आयोजन पर राहु-दृष्टि कलंकित कर चुकी है। शायद इस बार यह पहला मौका है जब धर्म-संस्‍थापनार्थ सदियों पहले आचार्य-शंकर द्वारा बनायी गयीं 4 पीठों में से एक पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य ने बाकायदा इस आयोजन को विरोधस्‍वरूप अलविदा कह दिया। तय हो चुका है कि द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्‍वामी सरूपानंद सरस्‍वती अब इस बार के आयोजन में शरीक नहीं होंगे। हालांकि प्रशासनिक और सरकारी तौर पर यही कहा जा रहा था कि स्‍वारूपानंद जी को कुम्‍भ में वापस बुलवाने की भरसक कोशिशें चल रही हैं। लेकिन आज मुख्‍यमंत्री ने ऐलान कर दिया कि नई परम्‍परा की गुंजाइश ही नहीं।

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Created on 04 January 2013

दिल्ली में चलती बस में हुये कुख्यात बस रेप काण्ड के विरोध में दिल्ली समेत देश भर में विरोध दर्ज कराने और आरोपियों को कड़ी सजा की मांग के लिए सडक़ों पर लाखों की संख्या में एकत्र हुई भीड़ नेतृत्व विहीन थी. भारत जैसे देश में जहां आम आदमी को केवल वोट समझा जाता हो, जहां आम आदमी की स्थिति पशुओं से भी बदतर हो, आम आदमी साढ़े छह दशकों के उपरांत भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो, जहां आम आदमी की नियति हाथ जोडक़र जी हजूरी करना माना जाता हो, जहां जात-पात, वोट बैंक की राजनीति सिर चढक़र बोलती हो, जहां विधायिका स्वयं को संसद और संविधान से ऊपर मानती हो, जहां नेता देश को अपने पिताजी की जागीर समझते हों, जनता से दुव्यर्वहार और विश्वासघात को अपना धर्म समझते हों, जहां प्रजातंत्र केवल नाममात्र का ही शेष हो. प्रजा पर तंत्र पूरी तरह हावी हो चुका हो, जहां जनता दो जून की रोटी के फेर में चौबीस घंटे व्यस्त रहती हो वहां शक्तिशाली सत्ता और मशीनरी के समक्ष आम आदमी का एकजुट होकर सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोलना इस शताब्दी की बड़ी घटनाओं और में से एक है.

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Created on 04 January 2013

कॉमरेड संजय नामदेव को फर्जी मुकदमों में गिरफ्तार कर केवल चार दिनों तक ही जेल के अन्दर रख सकी जिला पुलिस ने उनकी रिहाई के दो दिनों बाद ही फिर से गिरफ्तारी का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ऐसा सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि श्री नामदेव की राजनैतिक और समजिक गतिविधियां प्रभावित की जा सके। कॉमरेड नामदेव के सहयोगियों ने यह सूचना दी है कि उनके घर, दफ्तर और बैठने की अन्य जगहों पर बरगवां थाने की पुलिस लगातार दबिश दे रही है। ताजा प्रकरण 307 के एक मुकदमे का है जो नवम्बर 2010 मे कायम हुआ था। मामला हिन्डालको परिसर में एक दुर्घटना में एक विस्थापित श्रमिक की मौत का है, जिसके खिलाफ विरोध प्रर्दशन आयेजित हुए थे। प्रर्दशन के दौरान हुई झड़प के फलस्वरूप कॉमरेड संजय पर 307 का यह मुकदमा कायम किया गया।  

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Created on 04 January 2013

मशहूर पंजाबी रैप सिंगर हनी सिंह पर उनके गानों में अपशब्दों के प्रयोग और अश्लीलता के चलते लखनऊ के आईपीएस अधिकारी अमिताभ सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है, पर सवाल उठता है कि जब हनी पिछले तीन वर्षों से समाज में बेशर्मी से अश्लीलता परोसने का काम बेधड़क करता जा रहा था तब किसी देशभक्त का ध्यान उस ओर क्यों नहीं गया? मैं हनी सिंह का प्रशंसक नहीं हूं और न ही अमिताभ ठाकुर के प्रति कोई दुराभाव है किन्तु ऐसे समय जबकि देश में बलात्कार और उसकी सजा को लेकर बहस छिड़ी हो, क्या हनी सिंह को इतनी तवज्जो देना सही है? जबसे हनी सिंह पर पुलिस केस दर्ज हुआ है इलेक्ट्रानिक मीडिया का एक वर्ग हनी ओर उसके विवादित विडियो दिखा-दिखा कर आखिर क्या साबित करना चाहता है? आखिर क्यों हनी सिंह को बतौर मशहूर हस्ती पेश किया जा रहा है?

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Created on 04 January 2013

केंद्रीय मंत्री शशी थरूर का विवादों से विशेष रिश्ता है. वह जब भी कुछ बोलते हैं या सोशल साईट पर लिखते हैं एक विवाद खड़ा हो जाता है. परन्तु इस बार उनके लेखन से उनकी अपनी ही पार्टी और दल को अधिक परेशानी हुई है. पाश्चात्य पृष्ठभूमि और विचारों से प्रभावित शशि थरूर जो वर्तमान में केंद्रीय सरकार में मानव संसाधन मंत्री भी हैं, ने दिल्ली में बलात्कार की शिकार हुई दामिनी (काल्पनिक नाम) का वास्तविक नाम उसकी मृत्युपरांत भी सार्वजानिक ना करने पर सवाल उठाये हैं और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की रोकथाम पर बनाये जाने वाले संशोधित कड़े कानून का नाम भी दामिनी के वास्तविक नाम पर रखने की वकालत की है.

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Created on 04 January 2013

: अखिलेशजी! इनको नौकरी, मुआवजा नहीं न्याय की है दरकार : दिल्ली में गैंगरेप की शिकार दामिनी को न्याय दिलाने के लिए देश एकजुट हुआ। दरिंदों को सजा दिलाने की मांग ने जोर पकड़ा। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भुक्तभोगी लड़की और उसके साथी को नौकरी और आर्थिक मदद करने का ऐलान किया। देश के कोने-कोने से उठे जोरदार विरोध और मुख्यमंत्री के मदद का ऐलान, दोनों को अच्छी शुरुआत माना जा सकता है पर क्या आपको पता है यूपी में दर्जनों अभागी ‘दामिनियों’ का आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है। उनके परिजनों को न्याय की दरकार है। इन गुमनाम ‘दामिनियों’ के लिए न तो कोई जुलूस निकला और ना ही कहीं धरना-प्रदर्शन। इनके लिए न्याय दूर की कौड़ी है। मिलिए इलाहाबाद और उसके बगल के जिले प्रतापगढ़, कौशांबी की इन अभागन दामिनियों से। ये रहीं दिल दहला देने वाली वारदातें।

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Created on 04 January 2013

"उत्तर प्रदेश की तकदीर में कांटे ही कांटे है, कभी मायावती तो कभी अखिलेश आते हैं" आखिर कब तक उत्तर प्रदेश को झूठे वादों से ये नेता लूटते रहेंगे।मायावती ने जमकर प्रदेश को लूटा, अब समाजवादी पार्टी की सरकार इस वादे के साथ आयी कि पूर्व में की गयी गलतियों को नहीं दोहराया जायेगा और यह वादा स्वयं युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया लेकिन कुछ भी नहीं बदला गुंडों का आतंक, निरंकुश पुलिस, हत्या, लूट, डकैती तो जैसे आम बात हो गयी l कड़कड़ाती ठण्ड में सरकार 13 दिन गर्म हीटरों में दुबकी रही और बाहर ठण्ड से गरीब दम तोड़ता रहा करोड़ों रुपया महोत्सव की गर्मी में उड़ गया, राजधानी लखनऊ से उठकर सैफई आ गयीl कहते है कि "पूत के पांव पालने में" दिखाई देने लगते है वही हाल उत्तर प्रदेश सरकार का है, नौ माह का समय बीत चुका और कुछ भी नहीं बदला, जिस वादे के साथ अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी को सत्ता में लाये थेl

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Created on 03 January 2013

हैदराबाद एमएलए अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भड़काऊ भाषण मामले लखनऊ के दो विद्यार्थियों तनया ठाकुर और उसके भाई आदित्य द्वारा आज गोमतीनगर थाना में एक एफआईआर दिया गया. थानाध्यक्ष एसके गौतम ने इन बच्चों द्वारा दिये गए प्रार्थनापत्र पर एफआईआर लिखने से साफ़ मना कर दिया. ओवैसी ने अपने भाषण में खुलेआम हिंदू-मुसलामानों में अतीव तनाव बढ़ाने वाले अत्यंत आपत्तिजनक और भड़काऊ बातें कही थीं. उन्होंने कहा था कि यदि पुलिस मात्र पन्द्रह मिनट के लिए हट जाए तो अल्पसंख्यक धर्म के लोग बहुसंख्यकों को उनका दम दिखा देंगे. साथ ही उन्होंने हिंदू धर्म के देवताओं के बारे में अत्यंत अनुचित और भद्दी बातें कहीं.

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Created on 03 January 2013

लखनऊ। 30 दिसम्बर, 2012 को यूपी प्रेस क्लब के सभागार में डॉ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ स्मृति पर्व का आयोजन किया गया। समारोह का प्रारम्भ स्व0 निशंक जी द्वारा लिखित सरस्वती वंदना का सस्वर गायन ‘मुझको भी अपना वर दो’ के साथ हुआ, जिसका गायन प्रो0 कमला श्रीवास्तव एवं सहयोगी डॉ0 सरोजनी सक्सेना, श्रीमती इन्दिरा श्रीवास्तव, श्रीमती स्मिता जैन एवं श्रीमती रेखा मित्तल द्वारा किया गया। डॉ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ के चित्रा पर माल्यार्पण करने वाले मुख्य अतिथियों में श्रीमती स्वरूप कुमारी बख्शी, श्री गोपाल चतुर्वेदी, श्री उदय प्रताप सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, डॉ0 सुधाकर अदीब, निदेशक, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान, प्रो शैलनाथ चतुर्वेदी, श्री महेश चन्द्र द्विवेदी (पूर्व डीजीपी, उ0प्र0), डॉ0 मंजुलता तिवारी व श्री गिरीश चन्द्र शुक्ला मुख्य थे।

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Created on 03 January 2013

दिल्ली में चलती बस में बहशी दरिंदों की हवस से सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई पैरामेडिकल की छात्रा की मौत पर कहा जा रहा है उसकी चिता मशाल बन 125 करोड़ देशवासियों को जगा गई है। दिल्ली में इंडिया गेट से लेकर मीडिया-समाचार पत्रों और सोशियल मीडिया पर आज यही चर्चा है, जैसे कुछ दिन पहले केजरीवाल, अन्ना हजारे और बाबा रामदेव की चर्चा थीं (तब भी देश को जागा हुआ बताया जा रहा था)। इस सबसे थोड़ा आगे निकलते हैं। मीडिया, समाचार पत्रों में धीरे-धीरे उसकी खबरें पीछे होती चली जाएंगीं। सोशल मीडिया में लोगों की प्रोफाइल पर लगे काले धब्बे भी जल्द हटकर वापस अपनी या किसी अन्य खूबसूरत चेहरे की आकर्षक तस्वीरों से गुलजार हो जाएंगे। अखबरों, चैनलों में कभी संदर्भ के तौर पर यह आएगा कि 16 दिसंबर 2012 को पांच बहशी दरिंदों ने दिल्ली के बसंत विहार इलाके में चलती बस में युवती से बलात्कार किया था, और उसे उसके मित्र के साथ महिपालपुर इलाके में नग्नावस्था में झाड़ियों में फेंक दिया गया था।

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Created on 03 January 2013

अभिव्यक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में गिरिडीह झंडा मैदान में आयोजित पुस्तक मेला के उद्घाटन समारोह के मौके पर भोरंडीहा, गिरिडीह के 78 वर्षीय बसंत शर्मा लिखित उपन्यास 'वर्चस्व' का लोकापर्ण किया गया। लोकार्पण गिरिडीह विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी, पूर्व विधायक चन्द्रमोहन प्रसाद, डीडीसी प्रमोद कुमार गुप्ता, एसडीओ संजय भगत, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कंचनमाला, उद्योग महाप्रबंधक कमलेश लोहानी, अभिव्यक्ति फाउंडेशन के कृष्णकांत और लेखक बसंत शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। सभी ने पुस्तक मेला के आयोजन की सराहना की और स्थानीय प्रकाशकों को और भी पुस्तकें प्रकाशित करने को प्रेरित किया। उपन्यास 'वर्चस्व' में नारी सशक्तिकरण की इस सदी में पुरुषों का अपनी पत्नी पर वर्चस्व, पत्नी के अपने स्वतंत्र विवेक और इच्छा के बीच के संघर्ष, उसके साथ न्यायपालिका की ओर भी बढऩे की चेष्ठा करते भ्रष्टाचार के घृणित पंजे और उसके निर्ममतापूर्वक मचोड़ दिए जाने के दृढ़ संकल्प के संघर्ष को चित्रित किया गया है।

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यह संसार

सोशल मीडिया पर सरकार की वक्र दृष्टि
दामिनी रेप कांड के विरोध में रायसीना हिल्स पर भीड़ के सैलाब ने सरकार और खुफिया तंत्र को हिलाकर रख दिया है। सरकारी मशनीरी हैरत में है कि बिना किसी नेतृत्व के इतनी बड़ी तादाद में जनता सिर्फ सोशल »
शर्म करो औवेसी, तुम्हारे कई सारे कथित पाक, अल्लाह की शरीयत पर चलने वाले मुल्क पूरे विश्व में भीख का कटोरा लिये खड़े हैं
मेरे कानों में मुसलमानों के एक घटिया नेता और झूठे खैख्वाह अकबरूद्दीन औवेसी की कड़वी भाषा रह रह कर गूंज रही है, यू ट्यूब पर जब से मैंने उस आस्तीन के सांप का जहर उगलता हुआ एक घण्टे का भाषण सुना तब »
नेतृत्‍व को नकारती जनता की भीड़
दिल्ली में चलती बस में हुये कुख्यात बस रेप काण्ड के विरोध में दिल्ली समेत देश भर में विरोध दर्ज कराने और आरोपियों को कड़ी सजा की मांग के लिए सडक़ों पर लाखों की संख्या में एकत्र हुई भीड़ नेतृत् »

माया महाठगिनी

बलात्‍कार और छेड़खानी में मीडिया में प्रकाशित अश्‍लील विज्ञापनों की भूमिका
मीडिया का नैतिक कर्तव्य है कि समाज में फैली हुई कुरीतियों से समाज को सजग करे, देश और समाज के हित के लिए जनता को जागरूक करें, परन्तु ऐसा लगता है कि धन कमाने की अंधी दौड़ में लोकतंत्र का यह चौथा स्तं »
सहारा इंडिया की चालाकी कहीं उसे डूबा ना दे
बिहार शरीफ : सहारा इंडिया दोबारा कोर्ट में अपीलीय प्रक्रिया में उलझा कर अपना हित साधा जा रहा है. निवेशकों की जमा राशि लौटने के बजाय उसे कन्वर्जन किया जा रहा है. कहीं सहारा इंडिया की यह चाल उसे ड »
झुंझुनूं सूचना केन्द्र बना आंदोलनकारियों की रणनीति का अड्डा
झुंझुनूं। प्रदेश के सूचना एवं जन सम्पर्क राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह के गृह जिले का सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय इन दिनों गहलोत सरकार व झुंझुनूं प्रशासन के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनान »

दम ले-ले घड़ी भर

डा. लक्ष्‍मीशंकर मिश्र 'निशंक' स्‍मृति पर्व आयोजित
लखनऊ। 30 दिसम्बर, 2012 को यूपी प्रेस क्लब के सभागार में डॉ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ स्मृति पर्व का आयोजन किया गया। समारोह का प्रारम्भ स्व0 निशंक जी द्वारा लिखित सरस्वती वंदना का सस्वर गायन ‘मुझ »
पुस्तक मेला में उपन्यास 'वर्चस्व' का लोकार्पण
अभिव्यक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में गिरिडीह झंडा मैदान में आयोजित पुस्तक मेला के उद्घाटन समारोह के मौके पर भोरंडीहा, गिरिडीह के 78 वर्षीय बसंत शर्मा लिखित उपन्यास 'वर्चस्व' का लोकापर्ण किया »
संपादकजी... छापकर आवरण पर... नग्न स्त्रियों की तस्वीर... ललकारते हैं रात में... (अंशु की तीन कविताएं)
1- संपादकजी,छापकर आवरण परनग्न स्त्रियों की तस्वीरललकारते हैं रात मेंयही है तुम्हारी संस्कृतिदेख लो खजुराहो »

ये साली ज़िंदगी

जो जेल रुपराम ने बनाई थी, उसका पहला कैदी भी रुपराम ही बना
Rajen Todariya : टिहरी के राजा की भी कई दिलचस्प कहानियां है। यह उस समय की बात है जब सुदर्शन शाह के समय में टिहरी की जेल का निर्माण हो रहा था। इस जेल बनाने का ठेका रुपराम को दिया गया था। रुपराम ने अच्छी जेल »
माया कैलेंडर के मुताबिक 21 दिसंबर 2012 को दुनिया खत्म हो जाएगी!
21 दिसंबर 2012 को पूरी दुनिया के खत्‍म होने की चर्चाएं जोरों पर हैं. वैसे ज्यादातर लोग इसे अफवाह मानते हैं. आज हम आपको उन कारणों के बारे में बताएंगे जिसकी वजह से 21 दिसम्बर 2012 को पूरी दुनिया के खत्‍म ह »
'जानिए कौन है ये अनु टंडन' शीर्षक से प्रकाशित एक पोस्ट को लेकर एफबी, मेल और ब्लाग पर चर्चा तेज
कांग्रेसी सांसद अनु टंडन को लेकर एक पोस्ट आजकल खूब चर्चा में है. इसे सोशल मीडिया से लेकर वेब ब्लाग पर खूब दौड़ाया जा रहा है, फारवर्ड किया जा रहा है, शेयर किया जा रहा है, एक दूसरे को पढ़ाया जा रहा ह »

चल मुसाफिर

लड़कियां अपनी जिंदगी के बीस साल बहुत सोच-समझकर इन्‍वेस्‍ट करें
Manisha Pandey : मेरे एक परिचित, पढ़े-लिखे, बुद्धिजीवी और नौकरीपेशा पुरुष मित्र शादी के बीस साल बाद अपनी पत्‍नी को तलाक दे रहे हैं। पत्‍नी की हालत ऐसी है कि मानो उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई हो। उसके लिए ए »
कुम्‍भ में झंझट : जगदगुरु शंकराचार्य ने विरोध स्‍वरुप अलविदा कहा
धार्मिक और आध्‍यात्मिक प्रतीकों तथा आस्‍थाओं का सनातन पर्व महा-कुम्‍भ विवादों में आ गया है। प्राचीनतम परम्‍पराओं में पवित्रताओं के सवालों और बदलावों के प्रवाहों में जबर्दस्‍त रोड़े पड़ ग »
जिन्हें गैंगरेप पर पछतावा नहीं था, अब वे तिहाड़ पहुंच कर मौत मांग रहे
Shama Qureshi : दिल्ली गैंग रेप के बाद पूरे देश में रोष का महौल है...नहीं पता कितने लोगों को ये पता है कि जब कि कोई आरोपी रेप केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल पहुंचता है तो उसकी क्या हालत की जाती है..सूत्रों की म »

सुनिए-कहिए

फांसी नहीं, लंबी कैद दो रेपिस्ट को : राजेंद्र यादव
Rajendra Yadav : आज 31 दिसंबर यानी वर्ष का अंतिम दिन। ना जाने कब से मैं नये साल का स्वा्गत दोस्‍तों के साथ मिलकर करता रहा हूं। खाना-पीना, हंसी-मजाक के साथ हमलोग 12 बजे के बाद अपने-अपने घरों की राह लेते थे। मग »
A rape charge is no bar for politicians: 260 MLAs and MPs contested polls while facing sexual assault charges
Political parties may have joined the entire nation in expressing outrage over the gang rape of a 23-year-old girl in the Capital, but they have never shied away from fielding in elections the candidates facing charges of crimes against women. A report compiled by the National Election Watch (NEW) and the Association for Democratic Reforms (ADR) has revealed that about 260 candidates facing charges such as rape, assault and outraging the modesty of a woman contested assembly elections on tickets »
Today Delhi has been treated as South Chattisgarh, North East and Kashmir! Silenced!
Rukmini Sen : Silence like a RAPE grows!!! She is dead. But we have been dead for so long. Dead and compliant with all silences. We are silent in our homes, We don't orient our brothers about our feelings, We don't tell our sisters that voicing indignation is a must, we don't stand by our mothers when they fight with our fathers for basic self respect, we don't tell our fathers to back off when they must... we let our romantic and marital partners violate us with their regressive and sometimes t »

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